नैनीताल: सरकार भले ही सरकारी स्कूलों की सुविधाओं में विस्तार कर छात्रसंख्या बढ़ाने पर जोर दे रही हो, लेकिन जिम्मेदार विभाग व अधिकारियों को न तो सरकारी आदेशों की चिंता है
और न ही इन विद्यालयों में अध्ययन कर रहे बच्चाें की सुध। शहर के ब्रेसाइड क्षेत्र स्थित प्राथमिक पाठशाला की जर्जर हालत भी सिस्टम व जिम्मेदारों की इसी अनदेखी को बयां कर रही है। ब्रिटिशकालीन भवन में स्थापित स्कूल की दीवारे टूटी है तो बच्चों के लिए मूलभूत सुविधा तक मौजूद नहीं है। स्कूल बंद होते ही यह भवन नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है। मंडल व जिला मुख्यालय के बीच स्थित स्कूल का यह हाल शिक्षा विभाग के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में सुविधा विस्तार के दावों की भी पोल खोल रहा है।
शहर के ब्रेसाइड क्षेत्र स्थित ब्रिटिशकालीन भवन में प्राथमिक विद्यालय का संचालन होता है। आसपास के स्कूलों में छात्रसंख्या कम होने पर तारा काॅटेज व शेर का डांडा स्थित विद्यालयों का भी कुछ वर्ष पूर्व इस स्कूल में समायोजन कर दिया गया। वर्तमान में विद्यालय में 18 छात्र व पठन पाठन के लिए दो शिक्षक तैनात है। इसी भवन में दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। लेकिन देखरेख व विभागीय अनदेखी के चलते यह विद्यालय भवन दम तोड़ रहा है। भवन की दीवार क्षतिग्रस्त होने से शिक्षिकाएं भीतर साड़ी व परदे टांगकर बच्चों को बढ़ाने पर मजबूर है। क्षेत्रीय सभासद जितेंद्र पांडे ने बताया कि भवन को दुरूस्त करने के लिए कई बार संबंधित विभागीय व प्रशासन तक को पत्राचार किया जा चुका था। बीते वर्ष भवन मरम्मत के लिए जिला योजना से से करीब छह लाख का बजट भी जारी किया गया था। लेकिन विभाग की ओर से भवन मरम्मत के कार्य नहीं कराने के कारण बच्चे खतरे की जद में पढ़ने को मजबूर है। उन्होंने शिक्षा विभाग अधिकारियों से भवन की मरम्मत करने की मांग की है।
सभासद जितेंद्र पांडे ने बताया कि स्कूल खत्म होने के बाद स्कूल परिसर नशेड़ियों के घिर जाता है। भवन की टूटी दीवार से भीतर घुसकर नशेड़ी अड्डा जमा लेते है। देर रात तक स्कूल भवन के भीतर से हो हल्ला मचा रहता है। जिसकी कोई देखरेख करने वाला नहीं है। ऐसे में कभी कोई बड़ी दुर्घटना का भी डर बना हुआ है।

