नैनीताल: नगर पालिका की ओर से अप्रैल में शुरू की गई लेक ब्रिज चुंगी को ठेके पर दिये जाने की प्रक्रिया दो माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। अब 21 माह के लिए टेंडर दिये जाने को लेकर सभासद व पालिकाध्यक्ष आमने सामने आ खड़े हुए है। सभासदों के विरोध के चलते टेंडर खाेलने पहुंचे समिति सदस्यों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। पालिकाध्यक्ष ने टेंडर नहीं होने की स्थिति में इस्तीफा देने की चेतावनी दी है, वहीं सभासद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास करने के बाद ही टेंडर एक वर्ष के लिए करने को लेकर अड़े है।
बता दे कि बीते वर्ष नगर पालिका की ओर से ही पार्किंग व चुंगी का संचालन किया जा रहा था। चुंगी शुल्क वसूली में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर पालिका ने हाई कोर्ट से इसका टेंडर कर ठेके पर दिये जाने की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद अप्रैल में पालिका ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बीते माह खुले टेंडर में दो ही आवेदक होने के कारण समिति ने इसे निरस्त कर दिया। नये सिरे से पालिका ने 21 माह के लिए टेंडर आमंत्रित किये। जिसकी तकनीकि बिट बीते दिनों खुल चुकी है। गुरूवार को टेंडर की वित्तीय बिट खोली जानी थी इससे पूर्व ही नया बखेड़ा खड़ा हो गया। दोपहर में टेंडर खोलने के लिए समिति के सदस्य पालिकाध्यक्ष कक्ष में बैठे थे। प्रक्रिया चल रही रही थी कि तमाम सभासद कक्ष में पहुंच बिना बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास किये बिना 21 माह के लिए टेंडर कराने पर आपत्ति जताने लगे। इस बीच पालिकाध्यक्ष व सभासदों के बीच तींखी नोंकझोंक होने लगी। जिससे मुख्य कोषाधिकारी समेत अन्य विभागों की तकनीकि टीम बिना टेंडर किये ही लौट गई। हालांकि ईओ रोहिताश शर्मा ने बीच बचाव कर मामला शांत कराने को प्रयास किया, लेकिन एक ओर पालिकाध्यक्ष टेंडर कराने तो दूसरी ओर सभासद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास किये बिना 21 माह के लिए टेंडर दिये जाने के विरोध में अड़े है। फिलहाल बोर्ड की आपसी खींचतान का नतीजा जो भी हो, लेकिन टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर टल गई है।
सभासदों ने 21 माह के टेंडर को एक्ट के विरुद्ध बताया………
पालिका कार्यालय पहुंचे तमाम सभासदों ने 21 माह के लिए टेंडर किये जाने के निर्णय को असंवैधानिक करार दिया है। सभासदों ने पालिकाध्यक्ष व ईओ को पत्र लिखकर कहा है कि नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 95 के तहत किसी भी अनुबंध निविदा के लिए पालिका बोर्ड का अनुमोदन अनिवार्य है। पूर्व में दो बार सभासदों ने पत्र देकर बोर्ड बैठक कराने की मांग की है, लेकिन बिना बोर्ड बैठक में अनुमोदन के 21 माह के लिए टेंडर किया जा रहा है। पालिका की वित्तीय हालत को देखते हुए तत्काल 21 माह के टेंडर को निरस्त कर एक वर्ष का किया जाए। उनकी मांग के बाद भी निर्णय नहीं बदला गया तो सभी सभासद धरना प्रदर्शन को बाध्य होंगे। ज्ञापन देने वालों में जितेंद्र पांडे, मनोज साह जगाती, सुरेंद्र कुमार, ललिता दफौटी, रमेश प्रसाद, अंकित चंद्रा, सपना बिष्ट, गीता उप्रेती, राकेश पवार, गजाला कमाल, काजल आर्या, भगवत रावत, पूरन बिष्ट शामिल रहे।
पालिका अध्यक्ष का ये कहना ………….
पालिका की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए ही टेंडर को 21 माह के लिए किया जा रहा है। जिसकी न्यूनतम राशि 20.50 करोड़ रखी गई है। पूर्व में एक वर्ष के लिए किये गए टेंडर के निरस्त होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। पालिका व शहर की व्यवस्थाओं में सुधार करने के उद्देश्य से चुनाव लड़कर यहां पहुंची हूं, लेकिन उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कार्यालय में बैठकर क्या करना है, इस्तीफा ही बेहतर है। सरस्वती खेतवाल, पालिकाध्यक्ष नैनीताल।
